महात्मा गाँधी जी पर निंबध | essay on mahatma Gandhi ji in Hindi

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महात्मा गाँधी जी पर निबंध : महात्मा गांधी जी को भारत में राष्ट्रपिता और "बापू " के नाम से भी जाना जाता है । इनका पूरा नाम "मोहन दास करमचंद गांधी था" ।

महात्मा गांधी जी पर निबंध


गांधी जी हिंसा के बिल्कुल खिलाफ थे , इसीलिए उन्हें "अहिंसा के पुजारी" भी कहा जाता है ।

खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।  - महात्मा गांधी जी 

भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले लाखों स्वतंत्रता सेनानी थे उनमें से एक मुख्य नाम गांधी जी का है ।


गाँधी जी ने अंग्रेजो के खिलाफ भारत की जनता को एकजुट किया और भारत को 200 वर्षों की गुलामी से आजाद करवाया ।

Essay on mahatma ghandi ji in Hindi

हम आपको महात्मा गांधी जी पर लेख दे रहे हैं, जिसका उपयोग आप महात्मा गांधी जी की जयंती , school functions या निबंध प्रतियोगिता , भाषण प्रतियोगिता में कर सकते हैं ।


महात्मा गांधी जी का जन्म / गांधी जयंती   :

गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था ।

Essay on mahatma ghandi ji in hindi


गांधी जी के पिता जी का नाम करमचंद गांधी था और माता जी का नाम पुतलीबाई था ।

पुतलीबाई , करमचंद गांधी की चौथी पत्नी थी और वे उनकी आखिरी संतान थे ।

गाँधी जी जन्म से सामान्य व्यक्ति हि थे , वे अपने कर्मों से महान बनें और एक आदर्श समाज बनाने की कोशिश की ।

गाँधी जी की माँ धार्मिक रीति रिवाजों वाली औरत थी । वो घर के काम और बड़ों की सेवा में व्यस्त रहती थी ।

अपनी माता जी को देखकर गाँधी जी को बड़ों का सम्मान करने के संस्कार मिले ।

गाँधी जी के परिवार पर जैन धर्म का प्रभाव होने के कारण गांधी जी शाकाहारी और आत्मशुद्धि के लिए उपवास को महत्व देते थे ।

गाँधी जी के पिता कठियावाड़ के छोटे से रियासत ,पोरबंदर के दिवान थे ।

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महात्मा गांधी जी की शिक्षा

गाँधी जी बचपन की पढाई में एक सामान्य छात्र थे । वे स्कूल के खेल - कूद प्रतियोगिताओ में भी भाग लेते थे ।

उन्होंने पढ़ाई और खेल - कूद प्रतियोगिताओ में कई इनाम जीते थे ।

गाँधी जी ने शुरूआती शिक्षा पोरबंदर से पुरी हुई और इन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा राजकोट से दिया ।

इसके बाद मैट्रिक की पढाई के लिए गांधी जी को अहमदाबाद भेज दिया गया । अहमदाबाद से मैट्रिक पास करने के बाद इन्होंने लंदन से वकालत की पढाई संपन्न की ।

लंदन से वकालत की पढाई पुरी करने के बाद गांधी जी भारत आ गए और भारत में ही वकालत करने लगे ।

महात्मा गांधी जी पर निबंध


गाँधी जी का मानना था कि शिक्षा के माध्यम से एक आदर्श समाज की स्थापना हो सकती है ।

गाँधी जी ने भारत के नागरिकों को शिक्षा पर जोर देने के लिए प्रेरित किया । गांधी जी भारत की शिक्षा को " द ब्यूटीफुल ट्री " कहा करते थे ।

गाँधी जी चाहते थे कि प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार मिले और एक आदर्श समाज की स्थापना हो ।

गाँधी जी के शिक्षा सिद्धांत

  • 7 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा
     मिलनी चाहिए।
  • शिक्षा का माध्यम मातृभाषा हो।
  • साक्षरता को शिक्षा नहीं कहा जा सकता।
   •शिक्षा बालक के मानवीय गुणों का विकास करता है।


गाँधी जी की किशोरावस्था :

गाँधी जी किशोरावस्था से ही उचित, अनुचित में फर्क करना सीख चुके थे और अन्याय के खिलाफ लड़ते थे ।

जब गांधी जी केवल तेरह वर्ष के थे और पढाई कर रहे थे , तभी उनका विवाह पोरबंदर के एक व्यापारी की बेटी कसतुरबा  से करा दिया गया ।

किशोरावस्था से ही गांधी जी ने गलतियों में सुधार करना शुरू कर दिया था, जब भी उनसे कोई गलती हो जाती तो वो शपथ लेते थे " आज के बाद ये गलती दुबारा नहीं करूँगा " ।

 कुछ ऐसा जीवन जियो जैसे की तुम कल मरने वाले हो, कुछ ऐसे सीखो जैसे कि तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो। - महात्मा गांधी जी 

अपनी शपथ पर अमल करते हुए गांधी जी वो गलती दुबारा कभी नहीं करते थे ।
गांधी जी ने किशोरावस्था से ही आंदोलनों में भाग लेना शुरू कर दिया था ।

गांधी जी के आंदोलन

गांधी जी ने अपने जीवन में बहुत सारे आंदोलन किऐ । इस पोस्ट " महात्मा गांधी जी पर निबंध " में हम आपको गांधी जी के मुख्य आंदोलनों के बारे में बताएँगे ।

गांधी जी का दक्षिण अफ्रीका का आंदोलन

भारत में वकालत करते समय एक बार उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा । दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने देखा भारतीयों पर रंग भेद नीति के कारण अंग्रेज अत्याचार कर रहे थे ।

स्वयं गाँधी जी पर रंग भेद नीति के कारण अत्याचार हुआ । उससे प्रभावित होकर गांधी जी ने भारतीयों को अंग्रेजो के अत्याचारों से मुक्त कराने के लिए सत्याग्रह आंदोलन कर दिया ।
गाँधी जी का यह संघर्ष सात वर्ष से अधिक समय तक चला । दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीय अल्पसंख्यक समुदाय ने हार नहीं मानी और गाँधी जी के नेतृत्व में आंदोलन में डटे रहने का फैसला लिया ।

गाँधी जी का यह आंदोलन सफल रहा और दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीयों को उनका सम्मान वापस मिला । यहीं से गाँधी जी के आंदोलनों और अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष जीवन की शुरुआत हुई ।

असहयोग आंदोलन

गांधी जी ने अंग्रेजो के खिलाफ सितम्बर 1920 " असहयोग आंदोलन " शुरू किया, जो फरवरी 1922 तक चला । इस आंदोलन की प्रमुख वजह अंग्रेजो द्वारा जलियावाला बाग में किया गया नरसंहार था ।

यह आंदोलन राष्ट्रीय काॅग्रेस के नेतृत्व में गांधी जी के द्वारा चलाया गया था । इसे लोगों का अपार समर्थन मिला और यह आंदोलन सफल ।

इस आंदोलन के बाद अंग्रेजो को गाँधी जी के पिछे के जन समर्थन का अनुमान हो गया था । इस आंदोलन की वजह से भारत की जनता में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और सभी भारतीय भारत की आजादी के लिए एक साथ खड़े हो गए थे ।

नमक सत्याग्रह आंदोलन

अंग्रेजो ने नमक पर एकाधिकार कर लिया था और भारतीयों से मन मर्जी का टैक्स वसुल रहे थे । इसके खिलाफ गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी गाँव तक 24 दिनों का दांडी मार्च निकाला ।

चंपारण सत्याग्रह

ब्रिटिश सरकार के लोग जबरन भारतीय किसानों से नील की खेती करा रहे थे और किसानों को नील का दाम बहुत कम दे रहे थे । साथ ही किसानों को अपनी जमीन की भी चिंता थी क्योंकी नील की खेती से जमीनें खराब हो रही थी ।

नील की खेती से किसानों का गुजारा होना भी मुश्किल हो रहा था । गांधी जी ने इन किसानों को साथ लेकर चंपारण सत्याग्रह आंदोलन किया जो बिहार के चंपारण जिले से 1917 में शुरू हुआ ।

गांधी जी का यह सत्याग्रह भी सफल रहा और ब्रिटिश सरकार को किसानों की मांगे माननी पड़ी ।

दलित आंदोलन

दलितों पर हो रहे अत्याचारों को ध्यान में रखते हुए गांधी जी ने 1932 में अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना की ।

8 मई 1933 को गाँधी जी ने दलितों के साथ हो रही छुआछूत के विरोध में एक आंदोलन शुरू किया ।

भारत छोड़ो आंदोलन

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अखिल भारतीय काॅग्रेस के मुम्बई अधिवेशन से भारत छोड़ो आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया ।

यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ । इस आंदोलन में पुरा भारत एकजुट होकर खड़ा हो गया ।

इस आंदोलन से अंग्रेज डर गए और उन्हें 15 अगस्त 1947 को भारत को आजाद करना पड़ा ।

खिलाफत आंदोलन

प्रथम विश्व युद्ध के बाद  , तुर्की में खलिफा की दयनीय स्थिति को देखते हुए गांधी जी ने अंग्रेजो के खिलाफ 1919 में खिलाफत आंदोलन छेड़ दिया ।

गांधी जी अखिल भारतीय मुस्लिम सम्मेलन में प्रवक्ता बने और मुस्लिम संगठनों से आंदोलनों के लिए समर्थन मांगा । गांधी जी का यह आंदोलन भी सफल रहा ।

उपसंहार

महात्मा गांधी जी अपने दूर दृष्टि राजनीतिक विचारों और अहिंसा के मार्ग पर चलकर अन्याय के खिलाफ जीत हासिल करके विश्व में शांति और अहिंसा के पुजारी के नाम से प्रसिद्ध हुए ।


अहिंसा मानवता के लिए सबसे बड़ी ताकत हैं। यह आदमी द्वारा तैयार विनाश के ताकतवर हथियार से अधिक शक्तिशाली हैं। - महात्मा गांधी जी  

संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2007 में गांधी जी के जन्मदिन को " अहिंसा विश्व दिवस " के रूप में बनाने का निर्णय लिया ।

वे केवल एक नेता ही नहीं बल्कि एक निष्काम कर्मयोगी, तथा सच्चे अर्थों में युगपुरुष थे।

महात्मा गांधी जी के बारे में महान वैज्ञानिक आंइस्टीन ने कहा था " हजार साल बाद आने वाली पीढ़िया इस बात पर मुश्किल से विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई इंसान भी धरती पर कभी आया था।


3 comments:

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